• वाल्मीकि रामायण (उत्तर काण्ड), अध्यात्म रामायण

श्री राम लंका विजय के बाद अपने स्वर्णिम धनुष के साथ विजयी मुद्रा में खड़े हैं
अयोध्या के आकाश में आता दिव्य पुष्पक विमान और नीचे अश्रुपूरित नेत्रों से स्वागत करते राजकुमार भरत
कार्तिक अमावस्या की काली रात में सरयू नदी के तट पर जगमगाते मिट्टी के दीये
दीपों और गेंदे के फूलों से सजी अयोध्या की सड़कों पर श्री राम और माता सीता पर पुष्प वर्षा करती प्रजा
गुरु वशिष्ठ द्वारा स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान भगवान श्री राम का राज्याभिषेक
एक विशाल जलते हुए दीपक की ज्योति में भगवान श्री राम की दिव्य आभा का प्रकटीकरण

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भक्तों के मुख्य प्रश्न

कार्तिक अमावस्या को समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं, और नया धन-समृद्धि बिना सद्बुद्धि के नष्ट न हो, इसलिए साथ में गणेश जी भी पूजे जाते हैं।

इस रात सूर्य और चंद्रमा दोनों तुला राशि में होते हैं, जो सबसे अंधकारमयी तिथि मानी जाती है; अतः दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।

मिट्टी पांचों तत्त्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधित्व करती है, और इसमें जलने वाला तेल हमारे अहंकार का दहन कर जीवन में विनम्रता लाता है।

ग्रंथों के अनुसार अवधवासियों ने अपने घरों को ध्वजा-पताकाओं से सजाया, चौकों पर वंदनवार बाँधी और सरयू तट को दीपमालाओं से प्रकाशित कर अमर उत्सव बना दिया।

यह प्रकृति और अन्न का आभार प्रकट करने का पर्व है, जिसे रामराज्य की उस समृद्धि और कृषि-संस्कृति की पुनर्स्थापना के प्रतीक रूप में भी मनाया जाता है।

  • वाल्मीकि रामायण (उत्तर काण्ड), अध्यात्म रामायण

श्री राम लंका विजय के बाद अपने स्वर्णिम धनुष के साथ विजयी मुद्रा में खड़े हैं
अयोध्या के आकाश में आता दिव्य पुष्पक विमान और नीचे अश्रुपूरित नेत्रों से स्वागत करते राजकुमार भरत
कार्तिक अमावस्या की काली रात में सरयू नदी के तट पर जगमगाते मिट्टी के दीये
दीपों और गेंदे के फूलों से सजी अयोध्या की सड़कों पर श्री राम और माता सीता पर पुष्प वर्षा करती प्रजा
गुरु वशिष्ठ द्वारा स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान भगवान श्री राम का राज्याभिषेक
एक विशाल जलते हुए दीपक की ज्योति में भगवान श्री राम की दिव्य आभा का प्रकटीकरण

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भक्तों के मुख्य प्रश्न

कार्तिक अमावस्या को समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं, और नया धन-समृद्धि बिना सद्बुद्धि के नष्ट न हो, इसलिए साथ में गणेश जी भी पूजे जाते हैं।

इस रात सूर्य और चंद्रमा दोनों तुला राशि में होते हैं, जो सबसे अंधकारमयी तिथि मानी जाती है; अतः दीप जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।

मिट्टी पांचों तत्त्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधित्व करती है, और इसमें जलने वाला तेल हमारे अहंकार का दहन कर जीवन में विनम्रता लाता है।

ग्रंथों के अनुसार अवधवासियों ने अपने घरों को ध्वजा-पताकाओं से सजाया, चौकों पर वंदनवार बाँधी और सरयू तट को दीपमालाओं से प्रकाशित कर अमर उत्सव बना दिया।

यह प्रकृति और अन्न का आभार प्रकट करने का पर्व है, जिसे रामराज्य की उस समृद्धि और कृषि-संस्कृति की पुनर्स्थापना के प्रतीक रूप में भी मनाया जाता है।

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